।।कविता।।वरदान है बेटी।।
हमारे देश की गरिमा
घरो की जान है बेटी ।।
ईश्वर का, विधाता का
दिया वरदान है बेटी ।। 1।।
यही वह एक निधि हैं जो
स्वयम अवतार लेती है ।।
युगों तक ज्योति सी जलकर
नयी दुनिया बसाती हैं ।।
हमारे पुण्य का प्रतिफल
मिला सम्मान है बेटी ।।
ईश्वर का, विधाता का
दिया वरदान है बेटी।।2।।
कभी माता कभी पत्नी
कभी बहना भी होती है
अनेको रूप में आकर
हमे सहयोग देती है
हमारे घर की ममता पर
वतन की शान है बेटी ।।
ईश्वर का विधाता का
दिया वरदान है बेटी ।।3।।
बेटी से घृणित लोगो
तेरा जीवन अभागा है
उठो अब होश में आवो
कि पूरा देश जागा है
करो हृदय से स्वागत तुम
तेरा अभिमान है बेटी ।।
ईश्वर का विधाता का
दिया वरदान है बेटी ।।4।।
हमे यह याद रखना है
कि बेटी है तो बेटे हैं ।।
चलो सब आज मिल करके
यही संकल्प लेते हैं ।।
हमे इनको बचाना हैं
मिला सम्मान हैं बेटी ।।
ईश्वर का विधाता का
दिया वरदान है बेटी।।5।।
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