71- 🌷नही मिलेगा अवशर🌷
प्रेम पथो पर यदि आये हो तो बढते चलो निरन्तर ।
जीवन मे जीवन भर तुमको नही मिलेगा अवसर ।।1
बड़ी दूर है इसकी मंजिल बड़ी कठिन है राह
और अन्त मे तखलीफ़ो से होता नही निबाह
न जाने
कितनो ने पाया
दर्द यहाँ पर आकर ।
जीवन मे जीवन भर तुमको
नही मिलेगा अवसर ।।2
इक दो पग ही चल कर देखो इन राहों की हालत
औरों के गम देख देखकर मिल जायेगी राहत
नहीं सकोगे
तोड़ किसी के
दिल को तुम उलझाकर ।
जीवन मे जीवन भर तुमको
नही मिलेगा अवसर ।।3
इक आशा है ,सिर्फ यहाँ पर और नहीं कुछ बाकी
प्रेम पथों पर ही मिल पाती है जीवन की झाँकी
लौट चुके है
बहुत यहाँ से
वादो से अलसाकर ।
जीवन मे जीवन भर तुमको
नही मिलेगा अवसर ।।4
सिर्फ सुखों की आशा से जो आते नजदीक
नही मिल सकी है जीवन की अब तक उनको सीख
तुम भी देखो
देख चुका मै
कई बार अजमाकर ।
जीवन मे जीवन भर तुमको
नही मिलेगा अवसर ।।5
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
72- 🌷पर दिल को कैसे समझाऊँ🌷
आ ही जाती याद तुम्हारी चाहे जितना मै भुलवाऊ ।
मैंने मन को मार लिया हैं पर दिल को कैसे समझाऊ ।।1
इन पलको पर चलती रहती हैं तेरी तस्वीरें
बन जाता है रूप सलोना तेरा धीरे- धीरे
इक दो दिन की
बात नही है
बार-बार कैसे बहलाऊ ।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।2
न जाने क्यों जब से मैंने देखा हैं मुस्काना
तब से सिर्फ तुम्हारा दिल में लगा है आना -जाना
तुम्हें देखने की
चाहत है
तो तुमको कैसे बुलवाऊ ।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।3
जान रहा हूँ कभी नही हम आ पायेंगे पास
कितना भी तुम कोशिश कर लो ,कर लूँ मै प्रयास
फिर क्यों
धड़कन बढ़ जाती है
पास तुम्हारे जब नियराऊ ।
मैंने मन को मार लिया है
पर दिल को कैसे समझाऊ ।।4
तुमको क्या तुम निकल गये हो इस हॄदय पर करके घाव
दर्द मुझे होता रहता हैं तुमको क्यों होगा पछताव
बिना कहें ही
अपने मन से
मै तुमसे कैसे बतलाऊ ।
मैंने मन को मार लिया हैं
पर दिल को कैसे समझाऊँ ।।5
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
73- 🌷हम तुम पर भी कर पायेंगे🌷
बहुत हो चुका अपनापन यह आखिर कब तक समझायेंगे ।
जाने दो अब नहीं भरोसा हम तुम पर भी कर पायेंगे ।।1
हर दिल मे जब दर्द भरा है हर आँखें जब प्यासी
हर धड़कन मे नाम किसी का हर चाहत एक उदासी
किस किस की
आँखों मे यारों
उम्मीदे हम भर पायेंगे ।।
जाने दो अब नही भरोसा
हम तुम पर भी कर पायेंगे ।।2
सोच रहे थे हम तुम मिलकर बाटेंगे तकलीफें
हमे पता क्या एक बार फिर उभरेगी वो चीखें
वर्षों पहले
उन घावों पर
कब तक मरहम रख पायेंगे ।।
जाने दो अब नही भरोसा
हम तुम पर भी कर पायेंगे ।।3।
न जाने क्यों नही मिल रहा दुःख को एक सहारा
जिसको देखो वही फिर रहा प्यार का मारा मारा
इतना नाँलेज
मुझे नही कि
सबके गम को पढ पायेंगे।।
जाने दो अब नही भरोसा
हम तुम पर भी कर पायेगें ।।4।।
हमने सोचा कि तुमसे कुछ पायेंगे आश्वासन
परन्तु भरा हैं पहले से ही दर्दों से तेरा मन
वेपरवाही
होना ही हैं
दर्द नही हम हर पायेंगे ।।
जाने दो अब नहीं भरोसा
हम तुम पर भी कर पायेंगे ।।5
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
74- 🌷ऐसे कब तक चल पायेगा🌷
उम्मीदें अब टूटेगी कि प्यार का दीपक जल पायेगा ।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे ऐसे कब तक चल पायेगा ।।
झीलों सी तेरी आँखों मे एक बार पर तैर सकू मै
बनकर मछली तेरे दिल मे या यादों में सैर करू मै
थोड़ा सा
साहस पाकरके
प्रेम हमारा पल पायेगा ।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।2
एक बार तुम करके देखो थोड़ा सा संकेत
दिल की सारी बात कहूंगा तनिक न होगी लेट
आखिर देर
करोगे कैसे
प्रेम घडा यह भर पायेगा ।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।3
न आहे हैं ,न राहे है, न कोई एक निशानी
चाह रह हू उन होठों पर रच दू प्रेम कहानी
आशाओं का
मेरा सूरज
काश! कभी न ढल पायेगा ।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।4
जाने दो अब मै भी तुमसे नही करूंगा बात
हार गया हूँ संकेतों की करके मै बरसात
बिना तुम्हारे
उकसाने पर
प्रेम दीप न जल पायेगा ।
मै बोलू तुम शान्त रहोगे
ऐसे कब तक चल पायेगा ।।5
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
75- 🌷.ताकी तुमको बता सके हम🌷
अपनी यादों की दुनिया को एक बार फिर बसा सके हम ।
सिर्फ तुम्हारी ही चाहत हैं ताकि तुमकों बता सके हम ।।1
छोड़ दिया है अब हमने भी लोगों को समझाना
जान जान कर सब करते हैं जाने कौन बहाना
फिर भी कोशिश
ही करते है
ताकि तुमको मना सके हम ।
सिर्फ तुम्हारी ही चाहत है
ताकि तुमको बता सके हम ।।2
पूरी होती नहीं कभी भी अपने दिल की बातें
और फासलें बढ़ जाते है मेरे आते -आते
मै भी रुक रुक
कर आता हूँ
ताकि खुद को सता सके हम ।
सिर्फ तुम्हारी ही चाहत हैं
ताकि तुमको बता सके हम ।।3
कब तक दे पायेगी मुझको यादें एक सहारा
वादो पर ही वित न जायें मेरा जीवन सारा
अपनी आँखों
को तेरी सूरत
एक बार पर दिखा सके हम ।।
सिर्फ तुम्हारी ही चाहत हैं
ताकि तुमको बता सके हम ।।4।।
देख देख कर अनदेखा तुम कर देते हो अक्सर
मै भी तेरी ही आशा मे खो देता हूँ अवसर
थोड़ा सा
आश्वासन देते
ताकि तुमसे जता सके हम ।।
सिर्फ तुम्हारी ही चाहत हैं
ताकि तुमको बता सके ।।5
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
76- 🌷सिर्फ तुम्हारे खातिर🌷
अनदेखी तेरी तस्वीरें अंजाने हो आखिर ।
फिर भी रातों भर जगता हूँ शिर्फ़ तुम्हारे खातिर ।।१
न मानो तो मत मानो तुम मेरी यह सच्चाई
दिन भर बड़ी व्यस्तता रहती रातों में तन्हाई
जबकि तुमने
मेरे दिल को
तड़पाया हैं एक बार फिर ।
फिर भी रातों भर जगता हूँ
सिर्फ तुम्हारे खातिर ।।2
न आँखों को,न होठो को न तेरी आवाज़
नही जानता कौन, कहां तुम न तेरा अंदाज
हॄदय के इन
एहसासों तक
यादों से जाता हूँ घिर ।
फिर भी रातों भर जगता हूँ
सिर्फ तुम्हारे खातिर ।।3
न आते तेरे संदेशे न आती हैं नींदें
न मिलती हैं मुझे तसल्ली न कोई उम्मीदें
जब भी तेरी
याद करू मै
वही बेचैनी हाजिर ।
फिर भी रातों भर जगता हूँ
सिर्फ तुम्हारे खातिर ।।4
क्या कहते हो, सोच रहे क्या यदि पास हमारे होते
रोक न पाते अपने दिल को मन ही मन मुस्काते
न जाने
कैसे होगा वह
तेरे मन का मंदिर ।
फिर भी रातों भर जगता हूँ
सिर्फ तुम्हारे खातिर ।।5।।
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
77- 🌷इधर हमारा दिल भी🌷
दीवाली पर ज्योति जलेगी होगी इक झिलमिल सी ।
उधर तुम्हारा दीप जलेगा इधऱ हमारा दिल भी ।।1
जैसे -जैसे शाम ढलेगी बढ़ जायेगी रौनक
चहल पहल घर घर में होगी खुशियाली भी बेशक
सन्नाटा
होगा यादों मे
थोड़ी सी मुश्किल भी ।
उधर तुम्हारा दीप जलेगा
इधर हमारा दिल भी ।। 2
दूर दूर तक उजियारे में होगी इक परछाईं
अन्धकार मे सिर्फ नहीं मै मेरी भी तन्हाई
ढूँढेंगे हम
तेरी आहट
और एक मंजिल भी ।
उधर तुम्हारा दीप जलेगा
इधर हमारा दिल भी ।।3
हर दीपक मे तेरा चेहरा ,चेहरो के संकेत
ढूँढेंगे वे मुस्काने भी चाहत सकल समेत
परन्तु निराशा
ही पायेंगे
और हॄदय बोझिल भी ।
उधर तुम्हारा दीप जलेगा
इधर हमारा दिल भी ।।4
एक दीप मेरी चाहत का अपने दिल के मंदिर मे
प्रकाशित तुम कर ही देना चाह रहा हूँ आखिर मे
और बुझे न
इस जीवन तक
हो जायेगा काबिल भी ।
उधर तुम्हारा दीप जलेगा
इधर हमारा दिल भी ।।5
by-✍ रकमिश सुल्तानपुरी
78- *तन्हा ही रह जाने दो*
उन वादो से इन यादों से इस दिल को बहलाने दो ।
जब गम हमको मिला नही तो तन्हा ही रह जाने दो ।।1
जान रहा हूँ शायद तेरी भी कोई मजबूरी हो
लेकिन बिल्कुल सही नहीं कि दिल से इतनी दूरी हो
किसी तरह से
लम्हा लम्हा
अपने को अजमाने दो।।
जब गम हमको मिला नहीं तो
तन्हा ही रह जाने दो ।।2
कोशिश कर के देख लिया हूँ सबके दिल की आहट को
कोई अपना कब कह पाता अपने दिल की चाहत को
फूलो को जब
समझ न पाया
काँटे ही सहलाने दो ।।
जब गम हमको मिला नहीं तो
तन्हा ही रह जाने दो ।।3
किस किस से यह व्यथा कहूँ मै किस पर करू भरोसा
कुछ पल अपनापन दिखलाकर दे देते हैं धोखा
ताकि उनको
मिले सरलता
मंजिल पर बढ़ जाने दो ।
जब गम हमको मिला नहीं तो
तन्हा ही रह जाने दो ।।4
और कहें क्या इन आँखों मे चलती थी तस्वीरें
अब आँसू ही बचे हुये हैं वे भी धीरे -धीरे
बह जाते हैं
बह जायगे
तनिक शाम धुँधलाने दो ।
जब गम हमको मिला नहीं तो
तन्हा ही रह जाने दो ।।5
– रकमिश सुल्तानपुरी
79- *जीवन की बूटी*
न जाने कितने. लोगों. की उम्मीदें हैं टूटी ।
लाइक और कमेंट्स यहां पर है जीवन की बूटी ।।1
सावधान !बस यही फेसबुक हैं टाइम की बर्बादी
लागिन करते-करते हम सब हो जाते हैं आदी
प्रोफाइल की
अपनी फोटो
भी अब लगती झूठी ।
लाइक और कमेंट्स यहाँ पर
है जीवन की बूटी ।।2
फ्रेंड को अनफ्रेन्ड करेंगे चैटिंग पर मनमानी
पल भर में ही रच देते है झूठी एक कहानी
फिर भी उनकी
नोटीफिकेशन
हो जाती हैं जूठी ।
लाइक और कमेंट्स यहाँ पर
हैं जीवन की बूटी ।।3
धीरे धीरे मैसेज द्वारा बढ़ जाती हैं बातें
आनलाईन रहते-रहते ही कट जाती है रातें
ये तस्वीरें
चाहत वाली
हैं कितनो को लूटी ।
लाइक और कमेंट्स यहाँ पर
हैं जीवन की बूटी ।।4
आकर्षक लिंकों के द्वारा भेज रहे एनिमेशन
क्लिक करके जब थक जाते तो बढ जाता पागलपन
देखो इनकी
करतूते हैं
सबसे अलग अनूठी ।
लाइक और कमेंट्स यहाँ पर
हैं जीवन की बूटी ।।5
-रकमिश सुल्तानपुरी
80- *मैं उनसे पहले कह देता*
आँखों मे आँसू भर लेता ।
मै उनसे पहले कह देता ।।1
मन्द-मन्द मुस्कानों की खिली चाँदनी जो है
सचल दृगों के आँचल मे अनुराग रागिनी जो है
मधुरता मे
उठती सिहरन
बढ़ती आहट कम कर लेता ।
मै उनसे पहले कह देता ।।2
बधा हुआ हूँ कर्तव्यों से लगी हुई आशाएँ
विधा हुआ हूँ स्नेहों से बिखर रही अभाएँ
गले लगाकर
मयूषी को
हृदय पर पत्थर रख लेता ।
मै उनसे पहले कह देता ।।3
पहली कोशिश इन नयनों मे छिपने की छिप जाने की
चुभन बनी है कलियों की ,फ़ूलों की ,मुस्कानों की
परिहासों मे
आशाओं की
मुखरित ध्वनियों को सुन लेता ।
मै उनसे पहले कह देता ।।4
संचारित हो उठा सरस उर बढ़ती गयी जिज्ञासा
आह्लादित हो उठे नयन दो सिमट गई परिभाषा
पल्लवित मन के
उल्लासों मे
दर्दो को कैसे भर देता ।
मै उनसे पहले कह देता ।।
–रकमिश सुल्तानपुरी
अफ़वाहें उड़ती रहती हैं काव्य संग्रह
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