*जिंदगी इक दास्तां है*

जिंदगी इक दास्तां हैं कौन पढता हैं यहाँ
खत्म हो जाती अचानक छूट जाता हैं जहां
फिर भी न जाने दिलो मे क्यों बना हैं फासला ।।
आदमी वह नाम हैं जो रख सकेगा हौसला ।।1।।

जिंदगी इक याद हैं जो प्यार मे आती सभी को
दूर हैं पर दूरियों में भी तडपाती सभी को
वक्त तो रुकता नहीं मन तो निकला मनचला ।।
आदमी वह नाम हैं जो रख सकेगा हौसला।।2।।

जिंदगी इक स्वन सी आ टपकती सौक से  
सामना करनापडेगा हर किसी को मौत से
अन्त निश्चित हैं सभी का कुछ भी हो जायें चला
आदमी वह नाम हैं जो रख सकेगा हौसला।।6।।

जिंदगी इक सुबह सी लग रही खुशहाल हैं ।
पर किसी के दिल से पूछों दिल का कैसा हाल है ।।
रुकते रुकते चल रहे सब मौत का हैं मामला ।
आदमी वह नाम हैं जो रख सकेगा हौसला।।4।।

जिंदगी इक बूंद हैं दर्द के सिसकारियों की।
हैं टपक पडती अचानक  दर्द की परछाइयों सी ।
इक न इक दिन हम सभी को वक्त पर जाना चला हैं ।
आदमी वह नाम हैं जो रख सकेगा हौसला ।।5।।

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