जुगनू

जब आती है शाम सुहानी
तब आ जाता है जुगनू ।
बढ़ जाता है जब अँधियारा
दिख जाता है तब जुगनू ।।1।।

घर आँगन में फैल फैलकर
तारों सा छाता जुगनू ।
फिर बागों में सैर लगाकार
अपना मन बहलाता जुगनू ।।2।।

न जाने क्या ढूंढ ढूंढ कर
पुनः वहीं पर आता जुगनू ।
जगमग जगमग जलता क्या है
पता नही पाता हैं जुगनू ।।3।।

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