होली गीत
==========गीत============
रँग बरसे उड़े अबीर सूरतें भोली ।
अंग करें बदरंग खेलते होली ।
होली का त्योहार रंग बरसाते ।
बूढ़े युवा किशोर मिले हर्षाते ।
बड़े शैतानी
करें मनमानी
करते सब हुड़दंग बनाते टोली ।
अंग करें बदरंग खेलते होली ।
रँग बरसे ,,
लेकर लाल गुलाल करे हठजोरी ।
तिलक दिए सब भाल गाँव की ओरी ।
चले मस्ताने
भंग को पीने
झूम रहे घर द्वार मगन हमजोली ।
अंग करें बदरंग खेलते होली ।.
रँग बरसे,,
गले मे शोभित माल लाल कुछ पीला ।
ले रंगों की थाल हरे सँग नीला ।
ख़ुशी मे पागल ।
प्रेम का दंगल ।
रँग से करें प्रहार बोलते बोली ।
अंग करें बदरंग खेलते होली ।.
रँग बरसे,,
स्वरचित
✍ रकमिश सुल्तानपुरी
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