आज धोखा पल रहा है ।।
चिलचिलाती धूप से
सौन्दर्य से बच गया तो
शाम का ये धुँधलापन
स्नेह झोंका भर रहा है ।
आज धोखा पल रहा है ।।1
प्रेम को नापा गया है
आज कैसी नाप से
आँकना मुश्किल हुआ है
आज वार्तालाप से
रूप में भर शीलता
उभारते परिधान पर
भाव की हर भंगिमा मे
हो अनोखा झर रहा है ।
आज धोखा पल रहा है ।।2
आश्वाशन के लिये हम
क्या कहे हम क्या सहे
उम्रभर पाते नही मिट
विश्वासों के कहकहे
हैं दृगों के पंख चंचल
लड़खड़ाती वात से
वासना की कामना मे
अब भरोसा डर रहा है ।
आज धोखा पल रहा है ।।3
उद्विग्नता की हदों पर
आस जब खोती रही
जिंदगी मे प्रेम की
हार तब होती रही
है यहाँ चिंता किसे
अवसरों मे झुक गये
जो यादों के हर मोड़ पर
दुःख परोसा कर रहा है ।
आज धोखा पल रहा है ।।4
गर्व औ गरिमा हमारी
कब तलक घुट घुट जिये
प्यार का झांसा है फैला
लूट जाने के लिये
रास्ते है और भी
पर विवादों से घिरे
सम्मान की प्रतिद्वंद्विता मे
हृदय रोका कर रहा है ।
आज धोखा पल रहा है ।।5
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