रोशनी लाना पड़ेगा ।।

             रोशनी लाना पड़ेगा ।।
                                 02/06/09

उग नही सकती कहो क्यों
बंजरों मे पौधशाला
कान्ति जिसकी छिप गयी है
खोज के जाना पड़ेगा ।
रोशनी लाना पड़ेगा ।।1

शुष्क घासों की जड़ें
गुथ गयीं प्रक्षिप्त होकर
फूटते अंकुर परन्तु
छिप गये संक्षिप्त होकर
कंटकों की झाड़ियों मे
उर्बरता वह दब गयी है
सरपतों के ठूठ मे अब
दुःख तो उठाना पड़ेगा
रोशनी लाना पड़ेगा ।।2

कान्ति की सँध्या सजग है
मस्तिष्क की गहराइयों मे
अनगिनत है पंथ खुलते
अनुमान की अगडाइयों मे
मूकता की जाल से जो
बध गये असहाय हैं
सानिध्य उनका प्राप्त कर ।
शीश झुकाना पड़ेगा ।
रोशनी लाना पड़ेगा ।।3

नवयुवको की मानसिकता
कल्पना के नभ बनें है
इंद्रधनुषी रास्तों पर
अनमने ही चल पड़े है
पर सफलता एक ही
रास्ते पर मिल सकेगी
स्वप्न की दुनियां तो उनको
छोड़ के जाना पड़ेगा ।
रोशनी लाना पड़ेगा ।।4

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