आज क्यों आँशू बहाती ।।

          आज क्यों आँसू बहाती ?
                                    01/05/09

कर रही संघर्ष जो अब
उम्र के अंतिम पहर से
फिर भी अपने हृदय पुष्पों
के लिये सपने सजोंती ।
आज क्यों आँसू बहाती ?

माँ वही अंजुलि से जिसने
अम्बु की दो बूद डाली
लालयित सुष्क मुख मे
अमृत सा दूध डाली
आंचलों की हवा से
गोद मे सोने लगे जब
लोरियों की गुनगुनाहट
रुक रही धीमी न होती ।
आज क्यों आँसू बहाती ?1

खिलखिलाहट की हँसी मे
दुःख भरी धुँधली कहानी
भूल जाती नेह के हित
पोछती आँखों का पानी
सुदृड़ डगों की सेज पर
उबटनों से है सँवारा
अपने कम्पित उन डगों पर
चाहकर भी टिक न पाती ।
आज क्यों आँसू बहाती ?2

भौतिकता के सुखों का
कोना कोना छान लायी
कोमल अँगुली को पकड़कर
हो न हो चलना सिखायी
जो खिलौना बन गयी थी
मरमरी मुस्कान पर
उस लता की मुस्कराहट
लू लगी सी सूख जाती ।
आज क्यों आँसू बहाती ?3

प्यार का संगम था उमड़ा
ममता के तो पर लगे थे
तोतली बोली से जिसने
ये सुरीले स्वर भरे थे
कम्पित अधरों पर सजाये
दृग सुबह से शाम तक
बेटा कहने से अभी है
जिसकी वाणी लड़खड़ाती ।
आज क्यों आँसू बहाती ?4

उम्र के दो चार दस
वर्ष वो विस्मृत हुये ना
तौल दी ममता सुखों से
अपनत्व भी अर्जित हुए ना
देखते ही जी रही है
बन्धनों का ढीलापन
और भी रिस्तों की गाँठें
कस रहीँ हैं दूर जाती ।
आज क्यों आँसू बहाती ?5

                 
                        🌾🌾🌾

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें